पहले यशस्वी, अब वैभव! क्या Team India में Talent को पर्याप्त मौका मिल रहा है?
पहले यशस्वी जायसवाल… अब वैभव सूर्यवंशी!
एक खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहा हो, फिर भी उसे बाहर बैठना पड़े—तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या Team India में हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपनी काबिलियत साबित करने का बराबर मौका मिल रहा है?
यशस्वी जायसवाल से शुरुआत करते हैं।
यशस्वी ने T20I में 22 पारियों में 723 रन, 36.15 की औसत और 164.31 के स्ट्राइक रेट से बनाए थे। उनके नाम 5 अर्धशतक और 1 शतक भी था।
फिर भी T20I setup में उनकी जगह को लेकर सवाल उठे और Abhishek Sharma को लगातार मौके मिले।
अब यहां मैं एक बात बिल्कुल साफ कर दूं—
यह Abhishek Sharma के खिलाफ नहीं है।
Abhishek ने शानदार प्रदर्शन किया और अपने प्रदर्शन से जगह बनाई।
सवाल selection strategy का है।
अगर एक खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो उसे हटाने का आधार क्या होना चाहिए?
और अगर टीम combination की वजह से उसे बाहर किया जा रहा है, तो क्या उसे batting order में दूसरी जगह adjust नहीं किया जा सकता?

OPENING सिर्फ OPENING क्यों?
यहां एक और महत्वपूर्ण बात है।
अगर कोई खिलाड़ी opener है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह नंबर 3, 4 या 5 पर बल्लेबाजी नहीं कर सकता।
यशस्वी जायसवाल, देवदत्त पडिक्कल या वैभव सूर्यवंशी जैसे बल्लेबाज जरूरत पड़ने पर नीचे भी बल्लेबाजी कर सकते हैं।
हर खिलाड़ी को सिर्फ एक fixed position में बांध देना जरूरी नहीं।
अगर किसी खिलाड़ी में मैच जिताने की क्षमता है, तो team management को batting order में flexibility रखनी चाहिए।
आखिर खिलाड़ी टीम के लिए खेलता है, सिर्फ अपनी position के लिए नहीं।
अब आते हैं वैभव सूर्यवंशी पर।
15 साल का यह खिलाड़ी IPL में शानदार प्रदर्शन करके Team India तक पहुंचा।
इंग्लैंड के खिलाफ उसका international debut हुआ।
Zimbabwe दौरे पर उसने 151 रन 196.10 के strike rate से बनाए और Player of the Series रहा। India Today
फिर आया Afghanistan के खिलाफ तीन मैचों का T20I series।
भारत ने series 3-0 से जीत ली।
लेकिन वैभव को तीनों मैचों में Playing XI में मौका नहीं मिला। The Indian Express
और यहीं सवाल उठता है।
अगर World Cup जैसा कोई बड़ा tournament नहीं चल रहा था…
अगर series भारत पहले ही जीत चुका था…
तो तीसरे मैच में एक युवा खिलाड़ी को मौका क्यों नहीं दिया गया?
हां, Sanju Samson ने अच्छा प्रदर्शन किया।
दूसरे मैच में उन्होंने 57 और तीसरे मैच में 50 रन बनाए। तीसरे मैच में Abhishek Sharma ने 108 रन भी बनाए। Hindustan Times
इसलिए उन्हें बाहर करने की मांग करना सवाल का समाधान नहीं है।
लेकिन क्या वैभव को कम-से-कम एक मैच में अपनी क्षमता दिखाने का मौका नहीं दिया जा सकता था?

Gambhir का जवाब
Gautam Gambhir ने कहा कि वैभव को अपनी opportunity का इंतजार करना होगा।
उनका कहना है कि जो खिलाड़ी पिछले 2-3 साल से प्रदर्शन कर रहे हैं, वे उस खिलाड़ी से आगे रहेंगे जिसने अभी शुरुआत की है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब वैभव को मौका मिलेगा, तो उसे लंबा run दिया जाएगा। ABP Live English
यह बात अपनी जगह सही है।
Competition जरूरी है।
लेकिन मेरा सवाल सिर्फ इतना है—
Competition में युवा खिलाड़ी को मैदान पर उतरकर compete करने का मौका भी तो मिलना चाहिए।
अब आता है सबसे बड़ा सवाल—ALL-ROUNDERS
आज Team India के T20 combination को देखिए।
Axar Patel…
Washington Sundar…
Nitish Kumar Reddy…
Shivam Dube…
और अलग-अलग परिस्थितियों में दूसरे all-round options भी।
BCCI की Afghanistan squad में Axar, Washington, Nitish और Harshit Rana जैसे multi-skill options शामिल थे; Harshit injury के कारण बाद में बाहर हो गए। BCCI
अब सवाल यह है—
क्या एक टीम को इतने ज्यादा all-rounders की जरूरत है?
मेरी नजर में T20 में एक balanced combination पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
उदाहरण के तौर पर—
5 specialist batsmen,
5 specialist bowlers,
और 1 genuine all-rounder।
बेशक wicketkeeper और परिस्थितियों के हिसाब से combination बदलेगा।
लेकिन सवाल यह है कि अगर हम 3-4 all-rounders खिलाएंगे, तो क्या specialist batsman या specialist bowler की जगह कम नहीं होगी?
Specialist खिलाड़ी क्यों जरूरी है?
एक specialist batsman की ताकत क्या है?
वह अकेले शतक लगाकर मैच जिता सकता है।
एक specialist bowler की ताकत क्या है?
वह अकेले 5 विकेट लेकर मैच पलट सकता है।
लेकिन अगर हर खिलाड़ी को all-rounder बनाने की कोशिश होगी, तो कहीं ऐसा न हो कि हमारे पास ऐसे खिलाड़ी बढ़ जाएं जो—
न पूरी तरह specialist batsman रहें,
न पूरी तरह specialist bowler।
All-rounder होना बुरी बात नहीं है।
लेकिन हर खिलाड़ी को all-rounder बनाना जरूरी भी नहीं है।
और यही बात वैभव जैसे खिलाड़ियों पर लागू होती है।
अगर वैभव एक specialist batsman है और उसकी सबसे बड़ी ताकत batting है, तो उसे उसी ताकत में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में बनने का मौका मिलना चाहिए।
उसे हर हाल में bowling या दूसरी भूमिका में ढालने की जरूरत नहीं।
इसी तरह specialist bowlers को भी अपनी core strength पर focus करने देना चाहिए।
अब सवाल Washington Sundar और Nitish Reddy जैसे खिलाड़ियों पर।
यह कहना सही नहीं होगा कि वे हमेशा खराब रहे हैं।
उदाहरण के लिए Afghanistan series के दूसरे मैच में Nitish Kumar Reddy ने 3/24 लेकर Player of the Match का प्रदर्शन किया। Hindustan Times
तीसरे मैच में भी उन्होंने 3 विकेट लिए। Jansatta
इसलिए criticism आंकड़ों के आधार पर होना चाहिए।
लेकिन broader सवाल फिर भी रहेगा—
क्या team को जरूरत से ज्यादा all-round options के कारण specialist players की जगह कम हो रही है?
यही debate जरूरी है।
और यहीं वापस आते हैं यशस्वी और वैभव पर।
अगर कोई player opener है…
तो क्या उसे दूसरे नंबर पर नहीं भेज सकते?
अगर किसी खिलाड़ी को बड़े tournament में risk नहीं करना चाहते…
तो Ireland, Afghanistan जैसी bilateral series में मौका क्यों नहीं?
और अगर खिलाड़ी fail होता है—
तो fail होने दीजिए।
क्योंकि failure भी international cricket की education है।
लेकिन बिना मौका दिए किसी खिलाड़ी का level कैसे पता चलेगा?
अच्छी बात यह है कि वैभव की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
West Indies के खिलाफ आगामी T20I series के लिए BCCI ने वैभव को squad में शामिल किया है। इस squad में Abhishek Sharma, Sanju Samson, Ishan Kishan, Shivam Dube, Axar Patel, Washington Sundar और Nitish Kumar Reddy भी हैं। BCCI
अब वैभव के पास मौका है।
अब उसे सिर्फ एक चीज करनी है—
मैदान पर उतरना और बल्ले से जवाब देना।

🔥 ENDING
मैं यह नहीं कह रहा कि वैभव को हर मैच में खिलाओ।
मैं यह भी नहीं कह रहा कि किसी established player को सिर्फ उसके लिए बाहर कर दो।
मेरी बात बहुत simple है—
जिस खिलाड़ी में talent है, उसे अपनी talent साबित करने का मौका जरूर मिलना चाहिए।
यशस्वी हो…
पडिक्कल हो…
वैभव हो…
या कोई और युवा खिलाड़ी।
Team India में competition जरूर होना चाहिए।
लेकिन competition का मतलब यह नहीं कि talent सिर्फ bench पर बैठकर इंतजार करता रहे।
मैदान दीजिए।
मौका दीजिए।
फिर फैसला बल्ले और गेंद को करने दीजिए।
क्योंकि आखिर में—
नाम नहीं, performance बोलनी चाहिए।
और वैभव…
जब तुम्हारी बारी आए—
बल्ला ऐसा चलाना कि फिर किसी को तुम्हारी बारी का इंतजार कराने की जरूरत ही न पड़े। 🇮🇳🏏

