Patna बिहार में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बेहतर अवसर देने की दिशा में सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में शिक्षा विभाग की योजनाओं में मॉडल स्कूल, डिजिटल लर्निंग, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उच्च शिक्षा के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इन पहलों में सबसे ज्यादा चर्चा मॉडल स्कूलों में JEE और NEET की मुफ्त कोचिंग को लेकर है। सरकार ने पटना के 10 मॉडल स्कूलों में इसकी शुरुआत की है और इसे राज्य के 155 मॉडल स्कूलों तक विस्तार देने की योजना है।
विद्यार्थियों को विशेषज्ञ शिक्षकों की कक्षाएं, डिजिटल स्टडी मैटेरियल, डाउट क्लियरिंग और नियमित टेस्ट जैसी सुविधाएं देने की व्यवस्था की गई है।इस पहल का सबसे बड़ा फायदा उन विद्यार्थियों को मिल सकता है, जिनके परिवार महंगी निजी कोचिंग का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला कोई छात्र अगर बिना अतिरिक्त फीस के JEE या NEET जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर पाता है, तो इससे शिक्षा में अवसरों की असमानता कम करने में मदद मिल सकती है।
551 मॉडल स्कूलों पर फोकस बिहार में मॉडल स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

सरकार की ओर से 551 मॉडल स्कूलों को लेकर बड़ा लक्ष्य सामने रखा गया है। इन स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक और बेहतर शैक्षणिक माहौल विकसित करने की कोशिश की जा रही है।इसके साथ ही राज्य में सरकारी स्कूलों में बिहार स्कूल लाइव क्लासेज की शुरुआत की गई है।
पटना के 150 सरकारी स्कूलों में लाइव क्लासेज शुरू करने की पहल के तहत कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को डिजिटल कंटेंट, लाइव लेक्चर, ऑनलाइन नोट्स और मॉक टेस्ट जैसी सुविधाएं देने की योजना है।यानी सरकार की कोशिश केवल स्कूल की इमारत और संसाधन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक को पढ़ाई का हिस्सा बनाने की भी है।
211 नए डिग्री कॉलेजों से उच्च शिक्षा का विस्तारस्कूल शिक्षा के साथ उच्च शिक्षा में भी बड़ा विस्तार किया गया है। बिहार में 211 नए डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इन कॉलेजों का उद्देश्य खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र के करीब उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना है।सरकार का व्यापक लक्ष्य राज्य में डिग्री कॉलेजों की संख्या को और बढ़ाकर 534 तक पहुंचाने का है। यदि यह लक्ष्य प्रभावी ढंग से पूरा होता है, तो बिहार के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच पहले की तुलना में आसान हो सकती है।
शिकायतों के समाधान के लिए सहयोग पोर्टल और 1100शिक्षा व्यवस्था में केवल पढ़ाई और इंफ्रास्ट्रक्चर ही महत्वपूर्ण नहीं है। विद्यार्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान भी उतना ही जरूरी है।इसी दिशा में विद्यार्थी सहयोग पोर्टल और डायल 1100 जैसी व्यवस्था शुरू की गई है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की शिकायतों को दर्ज कर उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। विद्यार्थी अपनी समस्या सिस्टम तक पहुंचा सकेंगे और उस पर कार्रवाई की निगरानी भी की जा सकेगी।
अब असली चुनौती जमीन पर अमल कीबिहार में शिक्षा को लेकर घोषणाएं और नई योजनाएं निश्चित रूप से बड़ी हैं, लेकिन इनकी असली सफलता जमीन पर क्रियान्वयन से तय होगी।मॉडल स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक हैं या नहीं, डिजिटल सुविधाओं का वास्तविक इस्तेमाल हो रहा है या नहीं, JEE-NEET की मुफ्त कोचिंग की गुणवत्ता कैसी है और 211 नए डिग्री कॉलेजों में विद्यार्थियों को पर्याप्त शिक्षक एवं संसाधन मिल रहे हैं—इन सवालों पर भी लगातार नजर रखनी होगी।
क्योंकि बिहार के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत है तो उन्हें सही अवसर, बेहतर शिक्षण व्यवस्था और समान संसाधन उपलब्ध कराने की।अगर सरकार की ये पहल अपने घोषित उद्देश्य के मुताबिक जमीन पर उतरती हैं, तो बिहार के सरकारी स्कूलों और उच्च शिक्षा व्यवस्था में आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।बिहार के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ये योजनाएं घोषणा से आगे बढ़कर वास्तव में हर छात्र तक पहुंच पाएंगी? यही आने वाले समय में इस शिक्षा मॉडल की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
